आज़ाद भारत में धार्मिक दंगों का कुटिल चेहरा !अटल बिहारी वाजपेयी!!

असम के नेल्ली कांड और अटल बिहारी वाजपेयी का क्या रिश्ता हो सकता है, ये कई लोगों को समझ नहीं आएगा। बहुत सारे लोगों को अब 1983 के नेल्ली कांड की याद भी नहीं है या उसके बारे में कुछ पता भी नहीं है। हालांकि, ये ऐसा कांड है जिसका अटल बिहारी वाजपेयी से अटूट रिश्ता है।

यह सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपाई होते हुए भी एक उदार छवि प्रचारित की जाती रही है, भले ही इसके अपने कारण हो सकते हैं।

हालांकि असम के नेल्ली में 1983 के फरवरी माह में हुए दंगे एक ऐसा घटनाक्रम है जिसके बारे में जानकर कई लोगों की आंखें खुली रह जाएंगी।

वैसे इसके बारे में 28 मई 1996 को लोकसभा में विश्वास मत पर हो रही बहस के दौरान सीपीआई के इंद्रजीत गुप्ता भी बोल चुके हैं और संसद की कार्यवाही में यह दर्ज है।

इसके अलावा, वरिष्ठ पत्रकार एनपी उल्लेख ने द अनटोल्ड वाजपेयी: पॉलिटीशियन एंड पेराडॉक्स नाम की किताब में भी इसका जिक्र किया है।

मामला ये था कि असम उन दिनों काफी अशांत था और कई संगठन विधानसभा चुनावों का बहिष्कार कर रहे थे। उसी समय भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अटल बिहारी वाजपेयी असम के नेल्ली में चुनाव प्रचार करने गए।

वहां उन्होंने घुसपैठियों के संवेदनशील मुद्दे पर बेहद भड़काऊ भाषण दे दिया। उन्होंने कहा: “असम में इतने घुसपैठिए आ गए हैं। अगर ये लोग पंजाब में आए होते तो इन्हें काटकर फेंक दिया गया होता।”

कई संदर्भ देकर उल्लेख एनपी ने लिखा है कि वाजपेयी के का का इस भाषण से जनता भड़क गई और देखते ही देखते कुछ ही घंटों में 2000 से ज्यादा लोग मार डाले गए।

हालात यहां तक हो गए थे कि खुद भाजपा ने अपने को अटल बिहारी वाजपेयी के इस बयान से खुद को अलग कर लिया था।

(स्रोत- द अनटोल्ड वाजपेयी: पॉलिटीशियन एंड पेराडॉक्स
Hindi अनुवाद: महेंद्र यादव)
Mr Mahendra Yadav

Published by Cow

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